Thursday, April 17, 2008

वनवासियों को भूमि

Land to Tribal People living in Forest वनवासियों को भूमि
 

अनुसूचित जनजाति और अन्य पारम्परिक वनवासी (वनवासी अधिकारों को मान्यता) अधिनियम, 2006 को 2 जनवरी, 2007 का अधिनियमित किया गया है, जिससे कि अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों सहित वन भूमि में वन अधिकारों और व्यवसाय को उन लोगों को अधिकार और मान्यता दी जा सके जो अनुसूचित जनजाति के वनवासी हैं और पारम्परिक वनवासी हैं जोकि पीढियाें से ऐसे वनों में पहले से निवास कर रहे हैं लेकिन जिनके अधिकारों और इस प्रकार से विहित वन अधिनियम को रिकार्ड करने के लिए एक फ्रेमवर्क प्रदान करने और वन भूमि के प्रबंध में ऐसी मान्यता और अधिकारों के लिए अपेक्षित साक्ष्य की प्रकृति को अभिलिखित नहीं किया जा सका था । इस अधिनियम के तहत नियमों को 1 जनवरी, 2008 से अधिसूचित किया गया है । अधिनियम के अनुसार, वन भूमि के संबंध में वनवासी अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारम्परिक वनवासियों के वन अधिकारों को मान्यता देना और प्रदान करना इस शर्त पर होगा कि ऐसी अनुसूचित जनजातियां अथवा जनजाति समुदाय अथवा अन्य पारम्परिक वनवासी दिसम्बर, 2005 के 13वें दिन से पहले वन भूमि पर अधिग्रहित थे, जिसमें पारम्परिक वनवासी से अभिप्राय है कोई सदस्य अथवा समुदाय जिसकी दिसम्बर, 2005 के 13वें दिन से पहले कम से कम तीन पीढियां मुख्यत: वनों में रह रही थी और जो वन अथवा वन भूमि पर वास्तविक जीवनयापन आवश्यकताओं के लिए निर्भर करते हैं ।

 

        अधिनियम की धारा 4 की उपधारा 6 में किसी व्यक्ति अथवा परिवार अथवा समुदाय के लिए अधिनियम की शुरूआत की तिथि पर भूमि की सीमा परिकल्पित है जो कि वास्तविक अधिग्रहण तक प्रतिबंधित होगी और किसी भी मामले में 4 हेक्टेयर से अधिक नहीं होगी । तथापि, इस अधिनियम के अंतर्गत राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के संवेदनशील वन्यजीव पर्यावासों में मान्यता प्राप्त वन अधिकारी को जैसा कि अधिनियम की धारा 2 (ख) के अंतर्गत निर्धारित और अधिसूचित है, अधिनियम की धारा 4 (2) के अनुसार तदंतर संशोधित अथवा पुन: व्यवस्थित किया जा सकता है । अधिनियम के प्रावधान 21 दिसम्बर, 2007 से लागू हैं । तथापि, इस अधिनियम के कार्यान्वयन का पूरा करने के लिए कोई फ्रेमवर्क परिकल्पित नहीं किया गया है ।

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