छत्तीसगढ़ प्रदेश के नक्सल प्रभावित आदिवासी बहुल जिलों बस्तर और दंतेवाड़ा में साक्षरता अभियान के तहत नवसाक्षर हुए लगभग पन्द्रह हजार व्यक्तियों ने विगत तीन वर्षों में कक्षा पांचवी की परीक्षा उत्तीर्ण की है। इसके साथ ही बस्तर जिले में 419 नवसाक्षरों ने कक्षा आठवीं की परीक्षा भी उत्तीर्ण की है। समतुल्यता कार्यक्रम के तहत प्रदेश के हजारों नवसाक्षरों को पांचवी एवं आठवीं की परीक्षा में शामिल कर शालेय शिक्षा की मुख्यधारा में लाया जा रहा है। केवल बस्तर जिले में ही इस वर्ष 35102 नवसाक्षर कक्षा पांचवी तथा 22612 नवसाक्षर कक्षा आठवीं की परीक्षा में सम्मिलित हुए हैं।
राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के सदस्य सचिव श्री नंदकुमार ने बताया कि प्रदेश के नक्सल प्रभावित जिलों में बड़ी संख्या में साक्षरता केन्द्रों का संचालन कर यहां हजारों लोगों को पठन-पाठन करवाया जा रहा है। साक्षरता केन्द्रों में पठन-पाठन गतिविधियों के साथ ही कौशल विकास की अनेक गतिविधियां आयोजित कर नवसाक्षरों को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से बेहतर बनाया जा रहा है। इन नवसाक्षरों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए समतुल्यता कार्यक्रम के अन्तर्गत इन्हें पांचवी और आठवीं कक्षाओं की परीक्षा में सम्मिलित किया जा रहा है तथा इन परीक्षाओं में उत्तीर्ण नवसाक्षरों को स्कूलों में प्रवेश दिलाया जा रहा है।
प्रदेश के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिले दंतेवाड़ा में वर्ष 2004-05 में 453, वर्ष 2005-06 में 971 तथा वर्ष 2006-07 में 11260 नवसाक्षरों ने कक्षा पांचवी की परीक्षा उत्तीर्ण की है। इसी तरह बस्तर जिले में वर्ष 2005-06 में 232 तथा वर्ष 2006-07 में 1945 नवसाक्षरों ने कक्षा पांचवी की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है। इसके साथ ही इन्हें आर्थिक एवं व्यावसायिक कौशल वृध्दि का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलम्बी बनाने में मदद दी जा रही है।
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