वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय राज्य मंत्री, श्री अश्वनी कुमार ने यह जानकारी दी कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के संदर्भ में आंकी गई औद्योगिक विकास की दर दिसम्बर, 2007 के दौरान 7.7 प्रतिशत थी, जबकि इसकी तुलना में दिसम्बर, 2006 के दौरान यह दर 13.4 प्रतिशत थी ।
अर्थशास्त्री, औद्योगिक मंदी का कारण सामान्यतया उच्च ब्याज दर, कम उपभोक्ता मांग, रुपये की मूल्य वृध्दि के कारण निर्यात में मंदी, आम वैश्विक आर्थिक मंदी आदि बताते हैं । चालू वित्तीय वर्ष के पहले 10 महीनों (अप्रैल-जनवरी 2008) में औद्योगिक विकास की दर 8.7 प्रतिशत थी, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान यह दर 11.2 प्रतिशत थी ।
सरकार ने व्यापक आधार वाले औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक नीतियां बनाई हैं । इनमें अन्य बातों के साथ-साथ औद्योगिक क्षमता को लाइसेंस मुक्त करना, प्रतिस्पर्धी कीमतों पर इनपुट तक बेहतर पहुंच प्रदान करने हेतु विदेश व्यापार व्यवस्था में उदारीकरण, सीमा शुल्क तथा केन्द्रीय उत्पाद शुल्क की दरों को तर्कसंगत बनाना तथा उनमें कमी करना, बेहतर अवसंरचनात्मक सहायता, और उदार विदेशी प्रत्यक्ष निवेश व्यवस्था आदि शामिल हैं ।
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